ज़िन्दगी कभी ख़त्म नहीं होती,
एक राह के खो जाने पर, दूसरी बंद नहीं होती |
एक चिराग के बुझ जाने पर, रोशनी कम नहीं होती |
लोगों की भेड़ चाल देख, खुद ही भेड़ बन गए |
चाहते हो क्या जिन्दगी से,
ये पूछे बिना ही चल दिए |
हार के एक बार, फिर बार -बार ,
विपरित लहरों से कश्ती कभी पार नहीं होती |
किनारे बैठे रोने से कभी नाव खुद नहीं चल देती |
फूल हो आम का तो गुलाब कैसे बनोगे ?
गलती है तुम्हारी जो अपनी मिठास को छोड़,
सामने पड़े गुलाब की खुशबू के से बनने को चल दिए|
ना पहचान खुद को आप-ही -ग़म के सागर की ओर चल दिए |
पर जिन्दगी कभी ख़त्म नहीं होती
क्योंकि कोशिशे
कभी बंद नहीं होती,
बस पहचान अपने आपको !
फिर चिराग तो क्या ,
सूरज की रोशनी भी कम होती |
एक राह के खो जाने पर, दूसरी बंद नहीं होती |
एक चिराग के बुझ जाने पर, रोशनी कम नहीं होती |
लोगों की भेड़ चाल देख, खुद ही भेड़ बन गए |
चाहते हो क्या जिन्दगी से,
ये पूछे बिना ही चल दिए |
हार के एक बार, फिर बार -बार ,
विपरित लहरों से कश्ती कभी पार नहीं होती |
किनारे बैठे रोने से कभी नाव खुद नहीं चल देती |
फूल हो आम का तो गुलाब कैसे बनोगे ?
गलती है तुम्हारी जो अपनी मिठास को छोड़,
सामने पड़े गुलाब की खुशबू के से बनने को चल दिए|
ना पहचान खुद को आप-ही -ग़म के सागर की ओर चल दिए |
पर जिन्दगी कभी ख़त्म नहीं होती
क्योंकि कोशिशे

बस पहचान अपने आपको !
फिर चिराग तो क्या ,
सूरज की रोशनी भी कम होती |
